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शादी होते ही जो पहला सवाल सिरà¥à¤« महिला के मन में नहीं बलà¥à¤•ि पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के मन में à¤à¥€ आता है, वह यह है कि आखिर बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने की सही उमà¥à¤° कà¥à¤¯à¤¾ है? लेकिन इस सवाल का à¤à¤• ही जवाब सà¤à¥€ लोगों के लिठसही नहीं हो सकता। अलग-अलग लोगों के लिठयह उमà¥à¤° अलग-अलग हो सकती है। बचà¥à¤šà¥‡ की पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग करने से पहले आपको अपने करियर, फà¥à¤¯à¥‚चर पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग, समय और सबसे जरूरी है कि अपनी उमà¥à¤° और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ जैसे फैकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤
मां बनने की नहीं है कोई परफेकà¥à¤Ÿ à¤à¤œ
वैसे तो महिलाओं को लगता है कि 20 से 30 के बीच बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देना ही सबसे सही समय है लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में न सिरà¥à¤« महिलाà¤à¤‚ बलà¥à¤•ि पà¥à¤°à¥à¤· à¤à¥€ इनà¥à¤«à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ का शिकार हो रहे हैं, à¤à¤¸à¥‡ में बड़ा सवाल यह है कि आखिर पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट होने और बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने की सही उमà¥à¤° कà¥à¤¯à¤¾ है? कहते हैं मां बनने के लिठकोई à¤à¥€ उमà¥à¤° परफेकà¥à¤Ÿ नहीं होती लेकिन फैकà¥à¤Ÿ यही है कि अगर आप पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट होने की कोशिश कर रही हैं तो उमà¥à¤° का à¤à¤• पड़ाव à¤à¤¸à¤¾ होता है जो दूसरे से बेहतर होता है।
शादी के इतने दिनों बाद करनी चाहिठबचà¥à¤šà¥‡ की पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿à¤‚ग
25-30 के बीच की उमà¥à¤° पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के लिठबेसà¥à¤Ÿ
अमेरिका के यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ ऑफ टेकà¥à¤¸à¤¸ के सोशयॉलजिसà¥à¤Ÿ की मानें तो बायोलॉजिकली लेट टà¥à¤µà¥‡à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤œ यानी 25 से 30 साल के बीच की उमà¥à¤° पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के लिठसबसे बेसà¥à¤Ÿ है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस वकà¥à¤¤ शरीर की पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ और दूसरे सिसà¥à¤Ÿà¤® à¤à¥€ अपनी चरम सीमा पर होते हैं। लेकिन आज के बदलते समय में जब परिवार छोटे हो रहे हैं और महिलाà¤à¤‚ फà¥à¤²-टाइम वरà¥à¤•िंग हैं à¤à¤¸à¥‡ में कम उमà¥à¤° में पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी को सà¤à¥€ के लिठसही नहीं कहा जा सकता।
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान डायबीटीज की जांच बेहद जरूरी
कà¥à¤¯à¤¾ कहती है सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€?
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑबà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨ और गाइनैकॉलजिसà¥à¤Ÿà¥à¤¸ की मानें तो à¤à¤• औरत का जनà¥à¤® 10 से 20 लाख अंडों के साथ होता है लेकिन जैसे-जैसे उसकी उमà¥à¤° बढ़ती है इन अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होती जाती है खासतौर पर तब जब मेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‚à¤à¤¶à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ होता है। वैसे तो कोई महिला जब तक मेनà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‚à¤à¤Ÿ कर रही है तब तक पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हो सकती है लेकिन 32 साल की उमà¥à¤° आते-आते महिलाओं की फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ घटने लगती है और जैसे ही कोई महिला 37 साल की होती है फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ रेट में कमी आने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और तेज हो जाती है।
35-40 के बीच पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट होने की आशंका 50% कम
जरनल हà¥à¤¯à¥‚मन रिपà¥à¤°à¥‰à¤¡à¤•à¥à¤¶à¤¨ में छपी की à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ में पाया गया कि वैसी महिलाà¤à¤‚ जो लेट थरà¥à¤Ÿà¥€à¤œ यानी 35 से 40 साल के बीच की होती हैं उनमें पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट होने की आशंका 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कम हो जाती है उन महिलाओं की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में जिनकी उमà¥à¤° 20 से 25 साल के बीच होती है। सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ की मानें तो हो सकता है कि 30 की उमà¥à¤° में à¤à¥€ किसी महिला के लिठगरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करना आसान हो लेकिन इस दौरान होने वाले बचà¥à¤šà¥‡ को कई तरह का खतरा रहता है। जैसे- डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® बीमारी या फिर पैदा होते ही बचà¥à¤šà¥‡ की मौत हो जाना जैसी घटनाà¤à¤‚। साथ ही बड़ी उमà¥à¤° में गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने वाली महिलाओं में पà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤²à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¤¸à¤¿à¤¯à¤¾, डायबीटीज और पà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤°à¥à¤® बरà¥à¤¥ जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ हो सकती हैं।
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